शांत झील का मंज़र हो चाँद झूमर सा टंगा रात की ठोड़ी पर झूलता हो, तारे मखमली रुई सी शांत झील का मंज़र हो चाँद झूमर सा टंगा रात की ठोड़ी पर झूलता हो, तारे...
तुम कितनी सुलझी हुई हो ना, जैसे की कोई रेशम का धागा, कितना भी करो हमेशा सुलझा। तुम कितनी सुलझी हुई हो ना, जैसे की कोई रेशम का धागा, कितना भी करो हमेशा सुलझा।
एक खूबसूरत शाम, चाँद के बहाने एक खूबसूरत शाम, चाँद के बहाने
अँधेरे तूफां को समेटे वह सारी हकीकत मेरी झुकी पलकों पर ठहरी हुई हैं ,तुम , चाँद और मैं डूबे हुए है... अँधेरे तूफां को समेटे वह सारी हकीकत मेरी झुकी पलकों पर ठहरी हुई हैं ,तुम , चाँ...
(चाँद उस दिन से हँसना भूल गुमसुम हो गया) (चाँद उस दिन से हँसना भूल गुमसुम हो गया)
मेरी प्रथम श्रृंगारस की कविता। मेरी प्रथम श्रृंगारस की कविता।